अडानी समूह ने दायर की आपराधिक मानहानि शिकायत, गुजरात कोर्ट ने दो पत्रकारों को किया तलब
अडानी समूह ने पत्रकार अभिसार शर्मा और लेखक-पत्रकार राजू परुलेकर के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई है। गुजरात की गांधीनगर स्थित अडालज की एक अदालत ने इस शिकायत पर सुनवाई करते हुए दोनों पत्रकारों को 20 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है।
आरोप क्या हैं?
अडानी समूह ने अपनी शिकायत में कहा है कि—
अभिसार शर्मा ने 18 अगस्त को अपने यूट्यूब चैनल पर प्रकाशित एक वीडियो में यह दावा किया था कि असम के दीमा हसाओ जिले में समूह को हज़ारों बीघा जमीन आवंटित की गई।
राजू परुलेकर ने जनवरी से लगातार सोशल मीडिया पोस्ट और रिट्वीट्स के जरिए ऐसे दावे किए, जिनमें अडानी समूह को जमीन सौदों और राजनीतिक लाभ से जोड़ा गया।
समूह का कहना है कि ये आरोप “झूठे और भ्रामक” हैं और कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से लगाए गए।
कानूनी आधार
शिकायत भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 356(1), 356(2) और 356(3) के तहत दर्ज कराई गई है। ये धाराएँ पहले की आईपीसी की मानहानि संबंधी धाराओं (499, 500 और 501) के बराबर मानी जाती हैं। इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर दो साल तक की सज़ा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
अडानी समूह का पक्ष
अडानी समूह ने कहा कि जिन दस्तावेजों का हवाला पत्रकारों ने दिया, उनमें से एक गुवाहाटी हाई कोर्ट का 12 अगस्त का आदेश है, लेकिन उस आदेश में समूह का नाम तक नहीं है। समूह ने साफ कहा कि जिस महाबल सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का उल्लेख किया जा रहा है, उसका अडानी से कोई संबंध नहीं है।
आगे क्या?
अदालत ने दोनों पत्रकारों को समन भेजते हुए 20 सितंबर को पेश होने का आदेश दिया है। अब अदालत यह तय करेगी कि शिकायत पर आगे आरोप तय किए जाएँ या नहीं।
विवाद का बड़ा पहलू
यह मामला सिर्फ अडानी समूह बनाम पत्रकारों का नहीं है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता और कॉरपोरेट मानहानि मामलों के बीच संतुलन का भी सवाल है। अदालत की कार्यवाही से यह भी तय होगा कि भविष्य में बड़े कॉरपोरेट और स्वतंत्र पत्रकारों के बीच कानूनी खींचतान किस दिशा में जाएगी।

