Skill India पर CAG की रिपोर्ट: “स्किल” से ज़्यादा “स्कैम” दिखा सिस्टम में!
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), जो Skill India Mission का मुख्य हिस्सा है, को लेकर भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट (No. 20 of 2025) में गंभीर खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार योजना में डेटा की पारदर्शिता, वित्तीय नियंत्रण और रोजगार परिणामों के स्तर पर कई गंभीर कमियाँ पाई गई हैं।
94% लाभार्थियों के बैंक खाते अमान्य
CAG ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 94.53% लाभार्थियों के बैंक खाते का विवरण अमान्य, NULL या अनुपलब्ध था। कई मामलों में बैंक खाते “11111111111”, “1234567890” जैसे संदिग्ध नंबरों से दर्ज पाए गए। यह स्थिति योजना के अंतर्गत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
फर्जी रिकॉर्ड और दोहराई गई फोटो
ऑडिट के दौरान कई फर्जी रिकॉर्ड, गलत दस्तावेज़ और डुप्लीकेट फोटो पाए गए। एक ही उम्मीदवार की तस्वीर कई अलग-अलग नामों के साथ दर्ज की गई थी। कई प्रशिक्षण प्रमाणपत्र ऐसी एजेंसियों द्वारा जारी किए गए, जो “Best-in-Class” मानक के अनुरूप नहीं थीं।
बंद प्रशिक्षण केंद्र और अधूरे वादे
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई प्रशिक्षण केंद्र पोर्टल पर सक्रिय दिखाए गए, जबकि भौतिक निरीक्षण में वे बंद पाए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि योजना का वास्तविक क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर कमजोर रहा।
रोजगार का लक्ष्य अधूरा
PMKVY के तहत प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं में से केवल 41% को ही रोजगार प्राप्त हुआ। यानी लाखों युवाओं को प्रशिक्षण तो मिला, पर स्थायी रोजगार नहीं मिला — जो योजना का मूल उद्देश्य था।
₹12,000 करोड़ पर उठे सवाल
CAG रिपोर्ट ने सीधे तौर पर “₹12,000 करोड़ का घोटाला” शब्द का प्रयोग नहीं किया, लेकिन डेटा विसंगतियों, फर्जी रिकॉर्ड और भुगतान में अनियमितताओं के चलते सार्वजनिक धन के उपयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। कई मीडिया रिपोर्टों और विश्लेषणों में यह भी कहा गया है कि ₹9,200 करोड़ से अधिक राशि से जुड़े मामलों में अनियमितताएँ पाई गईं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
CAG रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने सरकार पर बड़े पैमाने पर घोटाले के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस पार्टी ने कहा कि “Skill India युवाओं के भविष्य के नाम पर धोखा साबित हुई है।”
वहीं, सरकार की ओर से कहा गया कि रिपोर्ट में बताई गई कमियों को दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें आधार-आधारित ई-KYC, जियो-टैग्ड उपस्थिति और डिजिटल सर्टिफिकेट सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है।
CAG की सिफारिशें
रिपोर्ट ने सुझाव दिया कि भविष्य में
डेटा सत्यापन प्रक्रिया को अनिवार्य किया जाए,
प्रशिक्षण केंद्रों की जियो-टैगिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था हो,
और रोजगार परिणामों पर अधिक पारदर्शिता लाई जाए।
निष्कर्ष
CAG की रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि Skill India जैसी महत्वाकांक्षी योजना का प्रभाव तभी सार्थक होगा, जब डेटा पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण को प्राथमिकता दी जाए।
योजना ने जहाँ लाखों युवाओं को प्रशिक्षण देने का दावा किया, वहीं रिपोर्ट यह संकेत देती है कि प्रभावी निगरानी और परिणाम-आधारित नीति के बिना ऐसी पहलें अपने वास्तविक उद्देश्य से भटक सकती हैं।

