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दुलारचंद यादव हत्याकांड में बड़ा एक्शन, मोकामा से JDU प्रत्याशी अनंत सिंह गिरफ्तार…

पटना / मोकामा, 2 नवंबर 2025:

बिहार की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। मोकामा क्षेत्र के चर्चित बाहुबली नेता और जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह को पुलिस ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब राज्य में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी अपने चरम पर है।

 

🔹 क्या है पूरा मामला

 

मोकामा विधानसभा क्षेत्र में 30 अक्टूबर 2025 को गोलीबारी की एक घटना में 75 वर्षीय दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि यह झड़प दो राजनीतिक गुटों के बीच हुई थी, जो आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एक-दूसरे के विरोध में सक्रिय थे।

घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और ग्रामीणों ने आरोपी पक्ष पर गोलियां चलाने का आरोप लगाया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया, जिसमें गोली लगने के निशान और कई गंभीर चोटें पाई गईं।

 

🔹 आरोप और गिरफ्तारी

 

पुलिस जांच में शुरुआती सबूत मिलने के बाद मोकामा के पूर्व विधायक और जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह को बाढ़ स्थित कारगिल मार्केट इलाके से गिरफ्तार किया गया। उनके साथ दो सहयोगी — मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम को भी हिरासत में लिया गया है।

पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी (CID Bihar) को जांच सौंपी गई है ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल की जा सके।

 

🔹 राजनीतिक हलचल तेज

 

अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों ने इसे “सरकारी संरक्षण में पनपे अपराध का परिणाम” बताया है, जबकि जेडीयू ने अभी इस पर आधिकारिक बयान देने से परहेज किया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना मोकामा और आस-पास के इलाकों में चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है।

 

🔹 चुनाव आयोग की सख्ती

 

दुलारचंद यादव हत्याकांड के बाद चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी से रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने पूरे पटना और मोकामा क्षेत्र में अवैध हथियारों की जांच और जब्ती अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और ड्रोन सर्विलांस बढ़ा दिया गया है ताकि किसी भी तरह की हिंसा को रोका जा सके।

 

🔹 अनंत सिंह का विवादों से पुराना नाता

 

बता दें कि अनंत सिंह का नाम बिहार की राजनीति में लंबे समय से बाहुबली छवि के रूप में जाना जाता है। वे कई बार हत्या, रंगदारी और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामलों में आरोपी रह चुके हैं। हालांकि, हर बार वे अदालत से जमानत लेकर राजनीतिक सक्रियता बनाए रखते आए हैं।

2025 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने उन्हें मोकामा सीट से उम्मीदवार बनाया था, जिससे पहले ही सियासी हलचल मची हुई थी। अब गिरफ्तारी के बाद पार्टी पर भी सवाल उठने लगे हैं कि आखिर ऐसे उम्मीदवार को टिकट देने के पीछे क्या मजबूरी थी।

 

🔹 जनता में बढ़ी नाराज़गी

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि मोकामा अब एक बार फिर से अपराध और राजनीति के चौराहे पर खड़ा है। गांवों में भय और असुरक्षा का माहौल है।

एक स्थानीय निवासी के मुताबिक, “हम चाहते हैं कि चाहे कोई कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो, अगर उसने किसी की जान ली है तो उसे सजा मिलनी ही चाहिए।”

 

🔹 कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

 

इस वारदात ने बिहार की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब चुनाव के दौरान प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है, तब इस तरह की हत्या होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर इस केस की जांच निष्पक्ष और तेज़ी से नहीं हुई तो राज्य में चुनाव हिंसा और डर का माहौल और गहरा सकता है।

 

 

 

निष्कर्ष

 

दुलारचंद यादव हत्याकांड सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के उस अंधेरे चेहरे की याद दिलाता है, जहां सत्ता और अपराध का गठजोड़ बार-बार लोकतंत्र को चुनौती देता है।

अब देखना यह होगा कि अनंत सिंह जैसे प्रभावशाली नेता के खिलाफ पुलिस और प्रशासन कितनी सख्ती दिखाते हैं और क्या यह केस बिहार की राजनीति में कोई नया अध्याय लिखेगा या फिर पुराने ढर्रे पर ही दब जाएगा।

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