“छठ: मातृशक्ति की तपस्या और सूर्य की कृपा का अलौकिक मिलन”
लेखक – प्रेम राज , शिक्षक (वैशाली)
जब सुबह सबेरे मातृशक्तियां नदी के गहरे पानी में खड़े होकर उगते हुए सूर्य के उदय की आश में खड़ी होकर उनसे अपने पूरे परिवार और समाज की खुशहाली की कामना करती है इससे मनोरम दृश्य क्या हो सकता है ।
छठ का यह हठ व्रती और भगवान भास्कर दोनों के बीच चलता रहता है । वे आने में देर करते है लेकिन यम को भी वश में करने वाली माताएं कहां हारने वाली है , वे भी उस ठंडे जल में तब तक खड़ी रहती है जब तक भगवान भास्कर आकर उन्हें अपने परिवार , समाज के कष्ट , दुख , विषाद को खत्म करने का वचन ना दे दें।
सच में अद्भुत दृश्य होता है यह ।
महाशक्ति और ईश्वर का यह विहंगम रिश्ता हमें आज भी अपने समाज में जोड़े रखता है ,
आज बिखरते हुए समाज को एक करने में इस पर्व की काफी महती भूमि
का है ।
