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NCERT की किताब पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

CJI सूर्यकांत का सख्त रुख: “न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाज़त किसी को नहीं” —NCERT की किताब पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

एनसीईआरटी (NCERT) की कक्षा 8 की नई सोशल साइंस किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ विषय पर लिखे गए एक अध्याय ने देशभर में विवाद खड़ा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस मुद्दे पर सख्त नाराज़गी जताई है और इसे लेकर सुओ मोटु (स्वतः संज्ञान) कार्रवाई शुरू की है।

🔹 क्या है पूरा मामला?

एनसीईआरटी की नई किताब में “Corruption in Judiciary (न्यायपालिका में भ्रष्टाचार)” शीर्षक से एक अध्याय जोड़ा गया है। इसमें लिखा गया है कि देश की न्यायपालिका को न सिर्फ केसों की भीड़ बल्कि भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। किताब का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और कई वरिष्ठ वकीलों ने इसे “न्यायपालिका की साख पर हमला” बताया।

🔹 कपिल सिब्बल ने उठाया मुद्दा

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि
“कक्षा 8 के बच्चों को यह सिखाया जा रहा है कि न्यायपालिका भ्रष्ट है। यह हमारे संस्थानों की साख को नुकसान पहुंचाने वाला कदम है।”
उनकी इस आपत्ति के बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने तुरंत मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि वे पहले से ही इस विवाद से अवगत हैं और इस पर कई संदेश प्राप्त कर चुके हैं।

🔹 CJI सूर्यकांत का सख्त बयान
CJI ने कोर्ट में कहा —

“मैं किसी को भी इस संस्था (न्यायपालिका) को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। चाहे वह व्यक्ति कोई भी हो, कानून सब पर समान रूप से लागू होगा। न्यायपालिका की गरिमा पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे को अपने स्तर पर देखेगा और जरूरत पड़ने पर NCERT व शिक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा जाएगा।

🔹 किताब में क्या लिखा गया है?
किताब में कहा गया है —

“भारत की न्यायपालिका कई समस्याओं से जूझ रही है। भ्रष्टाचार, देरी से न्याय और जजों की कमी ने सिस्टम पर जनता का भरोसा कमजोर किया है।”
CJI के अनुसार, इस कथन में एकतरफा दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसमें न्यायपालिका की सकारात्मक भूमिका, स्वतंत्रता और सुधार प्रयासों का कोई उल्लेख नहीं है।
🔹 आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि यदि आवश्यक हुआ तो NCERT से विवादित अंश हटाने या संशोधित करने को कहा जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय भी इस पर आंतरिक समीक्षा कर रहा है।
🔹 बड़ा सवाल
यह विवाद अब सिर्फ एक किताब तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है —
क्या बच्चों को सिस्टम की कमियों के बारे में पढ़ाना चाहिए, या इससे संस्थानों की छवि को नुकसान होता है?
🔹 निष्कर्ष
CJI सूर्यकांत का यह बयान साफ संदेश देता है कि न्यायपालिका की मर्यादा और साख पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं, एनसीईआरटी और शिक्षा मंत्रालय के लिए यह घटना एक चेतावनी है कि पाठ्यक्रम में संतुलन और जिम्मेदारी दोनों जरूरी हैं।

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