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चूहे खा गए 7 करोड़ का धान

चूहे खा गए 7 करोड़ का धान

छत्तीसगढ़ के कवर्धा में सरकारी गोदाम से 26,000 क्विंटल धान गायब — जांच में खुला बड़ा खेल

कवर्धा (छत्तीसगढ़) | 8 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ के कवर्धा ज़िले से एक अजीबोगरीब और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। सरकारी गोदाम में रखा करीब 26,000 क्विंटल धान, जिसकी बाजार कीमत लगभग ₹7 करोड़ बताई जा रही है, रहस्यमय तरीके से गायब हो गया है।
अधिकारियों ने सफाई दी है कि धान चोरी नहीं हुआ, बल्कि चूहे, दीमक और कीड़ों ने खा लिया।

मामला क्या है?
यह मामला कवर्धा जिले के चारभाठा विपणन केंद्र से जुड़ा है।
यहाँ समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदे गए 7,99,000 क्विंटल धान का भंडारण किया गया था।
हाल में हुई सरकारी जांच में पाया गया कि लगभग 26,000 क्विंटल धान का कोई हिसाब नहीं है।
जब जांच अधिकारियों ने सवाल उठाए, तो गोदाम प्रबंधन और विपणन विभाग ने रिपोर्ट में लिखा —
“धान का एक हिस्सा लंबे समय से भंडारित था। बारिश, नमी, दीमक और चूहों के कारण यह खराब या नष्ट हो गया।”
अधिकारियों का तर्क — “धान खा गए चूहे”
विपणन अधिकारी धर्मेंद्र साहू ने कहा —
“धान चोरी नहीं हुआ है। कीड़े-मकोड़ों और चूहों ने नुकसान पहुंचाया है। यह प्राकृतिक क्षति है। हमने इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी है।”
हालांकि, आंकड़ों के हिसाब से यह दावा संदेहास्पद लग रहा है।
एक सामान्य चूहा प्रतिदिन 15 से 20 ग्राम अनाज खाता है।
अगर 26,000 क्विंटल (26 लाख किलो) धान गायब है, तो उसे खाने के लिए लाखों चूहों की फौज चाहिए होगी — और वो भी महीनों तक लगातार।
जांच में घोटाले की बू
जांच में कई गंभीर गड़बड़ियां भी सामने आईं —
फर्जी आवक-जावक रजिस्टर
मजदूरों की फर्जी उपस्थिति
CCTV फुटेज गायब या खराब
भंडारण रजिस्टर में हेरफेर
इन आरोपों के बाद चारभाठा केंद्र के प्रभारी को हटा दिया गया है।
विपणन विभाग ने कहा कि मामले की विभागीय जांच चल रही है और जरूरत पड़ी तो FIR दर्ज की जाएगी।

नियम क्या कहते हैं?
धान की खरीद और भंडारण के नियमों के अनुसार,
अगर भंडारित धान में 2% से अधिक कमी पाई जाती है, तो
जिम्मेदार अधिकारी का निलंबन और आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
यहां कमी 3% से अधिक पाई गई है, फिर भी अब तक किसी अधिकारी पर सीधी कार्रवाई नहीं हुई।
जनता और विपक्ष ने उठाए सवाल
घटना के बाद सोशल मीडिया पर “#PaddyScam” और “#ChhattisgarhScam” ट्रेंड करने लगा।
लोगों ने तंज कसा —
“इतने चूहे कहां से आए जो 7 करोड़ का धान खा गए?”
वहीं विपक्षी नेताओं ने इसे “भंडारण घोटाला” बताया है।
उनका कहना है कि धान को अवैध रूप से बेच दिया गया और अब चूहों का बहाना बनाकर भ्रष्टाचार को छिपाया जा रहा है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार,
धान में दीमक या फफूंद से नुकसान संभव है, लेकिन 26,000 क्विंटल जैसी भारी मात्रा प्राकृतिक कारणों से पूरी तरह नष्ट नहीं हो सकती।
यह मामला सिस्टम की निगरानी की विफलता और लापरवाही का परिणाम है।
अब आगे क्या?
राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
विपणन विभाग ने कहा कि संबंधित अधिकारी और भंडारण प्रभारी से वसूली की कार्रवाई की जा सकती है।
जिला प्रशासन ने सैंपल जांच रिपोर्ट और CCTV बैकअप मांगा है।
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ़ चूहों की करतूत का नहीं, बल्कि भंडारण व्यवस्था और सरकारी निगरानी की कमजोरी का आईना है।
धान किसानों से खरीदा गया, लेकिन उनका अनाज या तो घोटाले में बेच दिया गया या निगरानी की कमी से सड़ गया — दोनों ही स्थितियाँ जनता के पैसे की बर्बादी हैं।

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