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नेपाल में मूसलाधार बारिश से कोसी उफान पर, सुपौल में बाढ़ का खतरा बढ़ा

कोसी बैराज के 34 गेट खोले गए, 2.75 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया

नेपाल में हो रही लगातार भारी बारिश का असर अब बिहार में साफ दिखने लगा है। सप्तकोसी नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। हालात को देखते हुए नेपाल सीमा से सटे कोसी बैराज (बिरपुर, सुपौल) के 56 में से 34 गेट खोले गए और अब तक करीब 2.75 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।

सुपौल समेत कोसी तटवर्ती इलाके अलर्ट पर

पानी छोड़े जाने के बाद बिहार के सुपौल, अररिया, मधेपुरा और कटिहार जैसे जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।

प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

संवेदनशील इलाकों में बांधों की निगरानी बढ़ा दी गई है।

निचले इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।

कई जगहों पर राहत शिविर और नाव सेवा की तैयारी की जा रही है।

कोसी: “बिहार का दुःख” फिर दिखा रहा असर

कोसी नदी को लंबे समय से “बिहार का दुःख” कहा जाता है। हर मानसून में नेपाल की ओर से आने वाले पानी और नदी में तेज़ गाद जमाव (सल्टेशन) के कारण यह नदी बार-बार अपना रुख बदलती रही है।

2008 की कोसी त्रासदी अब भी लोगों की यादों में ताज़ा है, जब तटबंध टूटने से लाखों लोग प्रभावित हुए थे।

इस बार भी तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है, जिससे प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है।

किसानों और आमजन की चिंता बढ़ी

खेतों में लगी धान और मक्के की फसलें डूबने का खतरा है।

ग्रामीण इलाकों में सड़कों और छोटे पुल-पुलियों पर पानी चढ़ने से आवागमन प्रभावित होने लगा है।

लोग अपनी पशु-सम्पत्ति और अनाज बचाने में जुटे हुए हैं।

प्रशासन की तैयारी

सुपौल प्रशासन ने कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया है।

संभावित प्रभावित गांवों की सूची बनाकर राहत सामग्री की आपूर्ति की तैयारी है।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी अलर्ट मोड पर हैं।

 

कुल मिलाकर, नेपाल में बारिश का सीधा असर बिहार के सीमावर्ती जिलों में दिख रहा है। कोसी बैराज से लगातार बढ़ते डिस्चार्ज ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है और हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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