गणेश चतुर्थी 2025: जानिए इस पर्व का आध्यात्मिक महत्व और परंपराएं
लेख: धर्मेंद्र कुमार (वैशाली)
तिथि: 27 अगस्त 2025
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भूमिका
भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाने वाली गणेश चतुर्थी भारत का एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है। यह दिन भगवान श्री गणेश जी के जन्मोत्सव के रूप में श्रद्धा, भक्ति और उत्सव की भावना से मनाया जाता है। वर्ष 2025 में यह पर्व 7 सितंबर, रविवार को मनाया जाएगा।
देशभर में विशेषकर महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर भारत के अनेक हिस्सों में गणेश चतुर्थी को विशेष उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाता है।
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गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व
भगवान गणेश को “विघ्नहर्ता” और “सिद्धिदाता” कहा जाता है — जो हर कार्य की सफलता के पहले पूजे जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन माता पार्वती ने गणेश जी को मिट्टी से बनाया था और भगवान शिव ने उन्हें अपना पुत्र स्वीकार कर आशीर्वाद दिया था।
इस पर्व पर गणेश जी की स्थापना, पूजन, और विसर्जन की प्रक्रिया धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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पूजन विधि और परंपराएं
1. स्थापना: सुबह शुभ मुहूर्त में गणेश प्रतिमा की स्थापना की जाती है। मिट्टी या प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी प्रतिमाओं को घर, पंडालों और कार्यालयों में स्थापित किया जाता है।
2. व्रत और पूजन: भक्तगण उपवास रखते हैं और 10 दिनों तक गणपति बप्पा की आरती और भजन-कीर्तन करते हैं।
3. प्रसाद: गणेश जी को विशेष रूप से मोदक, लड्डू, केले, नारियल आदि अर्पित किए जाते हैं।
4. विसर्जन: 10वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश प्रतिमा का विधिपूर्वक जल में विसर्जन किया जाता है। इस दौरान “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों से वातावरण गूंज उठता है।
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2025 में विशेषताएं
इस वर्ष 2025 में पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता को देखते हुए देशभर में इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं बनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। साथ ही, कई शहरों में डिजिटल दर्शन की व्यवस्था की गई है, जिससे श्रद्धालु घर बैठे ही गणपति जी के दर्शन कर सकें।
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गणेश चतुर्थी का सांस्कृतिक आयाम
गणेश चतुर्थी सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। यह पर्व सभी वर्गों और समुदायों को जोड़ता है। लोककला, संगीत, नृत्य, और सामाजिक गतिविधियों से पंडालों में एक उत्सव का माहौल बनता है।
यह पर्व स्वराज्य आंदोलन के समय लोकमान्य तिलक द्वारा समाज को एकत्र करने के लिए सार्वजनिक रूप में मनाया जाने लगा था, और आज यह भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बन चुका है।
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संदेश
गणेश चतुर्थी हमें सिखाता है कि हर कार्य की शुरुआत सकारात्मक सोच और आस्था के साथ करनी चाहिए। गणपति जी हमें जीवन में आने वाले विघ्नों से निर्भय होकर जूझने और हर कार्य में “बुद्धि और विवेक” से निर्णय लेने की प्रेरणा देते हैं।
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उपसंहार
इस गणेश चतुर्थी, आइए हम सभी भगवान गणेश से यही प्रार्थना करें:
> “विघ्नों को हरने वाले, सिद्धि और बुद्धि के दाता, श्री गणेश हमारे जीवन में शुभता और सफलता प्रदान करें।”
गणपति बप्पा मोरया! मंगलमूर्ति मोरया!

