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हरतालिका तीज पर विशेष लेख

सूर्यकांत मिश्र , कॉपी एडिटर ( नेशन व्यू ) :-

भूमिका
भारतीय संस्कृति में पर्वों और व्रतों का विशेष महत्व है। यह पर्व न केवल धार्मिक भावना से ओत-प्रोत होते हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूती प्रदान करते हैं। इन्हीं व्रतों में से एक महत्वपूर्ण व्रत है हरतालिका तीज, जो विशेष रूप से महिलाओं द्वारा शिव-पार्वती के मिलन की स्मृति में मनाया जाता है। यह पर्व श्रद्धा, भक्ति और नारी शक्ति की प्रतीक है।

हरतालिका तीज का अर्थ और नाम की उत्पत्ति
“हरतालिका” दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘हर’ का अर्थ है हरण करना और ‘तालिका’ का अर्थ है सखी। यह नाम उस घटना पर आधारित है जब माता पार्वती की सखियों ने उनका हरण कर उन्हें वन में ले जाकर तपस्या के लिए प्रेरित किया था, ताकि वे भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त कर सकें।

पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। राजा हिमवान ने जब पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से तय किया, तब पार्वती की सखी उन्हें वन में ले गईं। वहां पार्वती ने निर्जल व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। उसी तपस्या की स्मृति में यह व्रत हर साल भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है।

व्रत की विधि और परंपराएं
हरतालिका तीज का व्रत विशेष रूप से सुहागिन स्त्रियाँ करती हैं। यह व्रत बहुत ही कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें निर्जल (बिना जल ग्रहण किए) उपवास रखा जाता है।

व्रत की प्रमुख विशेषताएं:

श्रृंगार: महिलाएँ इस दिन विशेष रूप से सजती-सँवरती हैं, हरे वस्त्र पहनती हैं और 16 श्रृंगार करती हैं।

पूजन: रात्रि में पार्वती और शिव की मिट्टी की मूर्ति बनाकर पूजा की जाती है।

कथा वाचन: हरतालिका तीज की व्रत कथा को श्रद्धा पूर्वक सुना और सुनाया जाता है।

जागरण: कई स्थानों पर महिलाएँ पूरी रात जागकर भजन-कीर्तन करती हैं।

सहेली-संग: इस पर्व में सखियाँ मिलकर उत्सव मनाती हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द्र और एकता भी बढ़ती है।

 

तीज और प्रकृति से संबंध
हरतालिका तीज का समय वर्षा ऋतु में आता है, जब प्रकृति हरी-भरी होती है। इस पर्व में हरियाली का विशेष महत्व होता है। झूले, गीत, लोकनृत्य और उल्लासपूर्ण वातावरण इस पर्व की विशेषता है। इसे नारी सशक्तिकरण और प्रकृति पूजा से भी जोड़ा जाता है।

हरतालिका तीज का सांस्कृतिक महत्व
यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नारी श्रद्धा, संकल्प और प्रेम का प्रतीक है। यह विवाह में विश्वास, प्रेम और समर्पण की भावना को दृढ़ करता है। साथ ही यह पर्व महिलाओं को आत्म-संयम, धैर्य और शक्ति की प्रेरणा भी देता है।

उपसंहार
हरतालिका तीज भारतीय संस्कृति का एक अद्भुत और आध्यात्मिक पर्व है, जो नारी शक्ति, भक्ति और प्रेम की मिसाल है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि सच्चे प्रेम और संकल्प से ईश्वर को भी प्राप्त किया जा सकता है। आज के समय में जब पारिवारिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, ऐसे पर्व हमें हमारी परंपराओं से जोड़ते हैं और हमें आत्मिक शुद्धि की ओर प्रेरित करते हैं।

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