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NEET छात्र अथर्व चतुर्वेदी की प्रेरणादायक कहानी

नई दिल्ली।

कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों तो उम्र, अनुभव और संसाधन मायने नहीं रखते। इस कहावत को सच कर दिखाया है 19 वर्षीय NEET छात्र अथर्व चतुर्वेदी ने, जिन्होंने Supreme Court of India में बिना किसी वकील के खुद अपना केस लड़ा और जीत हासिल की।

 

⚖️ क्या था मामला?

 

मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी Atharva Chaturvedi ने NEET परीक्षा दो बार अच्छे अंकों से पास की थी। इसके बावजूद उन्हें EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) कोटे के तहत प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट नहीं मिल पा रही थी।

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जब सभी रास्ते बंद नजर आए, तब अथर्व ने खुद सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया।

 

🏛️ सुप्रीम कोर्ट में ऐतिहासिक सुनवाई

 

सुप्रीम कोर्ट में यह मामला मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने आया। सुनवाई के दौरान अथर्व ने विनम्रता से कहा —

 

> “मुझे सिर्फ 10 मिनट दीजिए सर…”

 

 

 

इन 10 मिनटों में अथर्व ने कानूनी प्रावधानों, EWS आरक्षण और अपने अधिकारों को इतनी स्पष्टता से रखा कि अदालत भी प्रभावित हो गई।

 

यह मामला Chief Justice Surya Kant की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष सुना गया।

 

📜 कोर्ट का फैसला

 

सुप्रीम कोर्ट ने अथर्व की दलीलों को सही मानते हुए आदेश दिया कि

👉 उन्हें EWS कोटे के तहत MBBS में प्रोविजनल एडमिशन दिया जाए।

 

यह फैसला न सिर्फ अथर्व के लिए, बल्कि ऐसे हजारों छात्रों के लिए उम्मीद की किरण बना है जो सिस्टम की खामियों की वजह से न्याय से वंचित रह जाते हैं।

 

🧠 बिना वकील, खुद की तैयारी

 

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि अथर्व:

 

कोई वकील नहीं हैं

 

उन्होंने खुद कानून पढ़ा

 

केस फाइल की

 

और खुद कोर्ट में बहस की

 

 

उनकी यह जीत बताती है कि न्याय सिर्फ डिग्री से नहीं, समझ और हिम्मत से मिलता है।

 

🌟 देशभर में हो रही तारीफ

 

सोशल मीडिया से लेकर कानूनी जगत तक, हर जगह अथर्व की तारीफ हो रही है। लोग उन्हें

 

> “नई पीढ़ी की न्याय के प्रति जागरूकता की मिसाल”

बता रहे हैं।

 

 

 

🎓 एक नई शुरुआत

 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब अथर्व चतुर्वेदी का डॉक्टर बनने का सपना साकार होने जा रहा है। उनकी यह कहानी आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाती है कि

 

अगर आप सही हैं, तो अपने हक के लिए खुद खड़े होना भी काफी होता है।

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