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त्रिवेणी संगम पर आस्था का महास्नान—जहाँ धरती मिलती है दिव्यता से!

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)

पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर देश के सबसे बड़े आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन माघ मेला की शुरुआत शनिवार को हो गई। कड़ाके की ठंड और सर्दी की मार के बावजूद लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में पवित्र डुबकी लगाने के लिये सुबह से ही मौजूद रहे।

प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, आज लगभग 30 लाख श्रद्धालु संगम तट पर स्नान कर आस्था व्यक्त करेंगे। यह संख्या सुबह के शुरुआत के समय भीड़ की तादाद को दर्शाती है, जो दोपहर तक और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

 

प्रशासन की तैयारी और भीड़ अनुमान

प्रशासन ने कहा है कि माघ मेले के पूरे आयोजन में लगभग 12 से 15 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। यह संख्या पिछले वर्षों के रुझानों, टिकट-बुकिंग, कोषागार और ठहरने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के डेटा पर आधारित अनुमान है।

प्रयागराज जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग ने मेले में:

भीड़ नियंत्रण के लिये विशेष सुरक्षा कवच

अग्नि, स्वास्थ्य, और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था में वृद्धि

संगम तट पर स्नान मार्गों के नियमन

यातायात व पार्किंग प्रबंधन

जैसी तैयारियाँ पहले से कर रखीं हैं, ताकि लाखों लोगों को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित अनुभव मिल सके।

 

मौसम और चुनौती

हाल के दिनों की कड़ाके की ठंड को दरकिनार करते हुए, श्रद्धालु शीतलहर के बावजूद सुबह-सवेरे संगम में डुबकी लगाते देखे गए। मौसम विभाग के अनुसार ठंड का असर अगले कुछ दिनों तक बना रहने की संभावना है, जिससे प्रशासन और हेल्थ एजेंसियों ने भीड़ के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया है।

📌 ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व

पौष पूर्णिमा के अवसर पर स्नान को धार्मिक मान्यता अत्यंत पावन मानी जाती है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव, ब्रह्मा और विष्णु की उपासना का विशेष महत्व है। माघ मेला हजारों वर्षों से चलता आ रहा एक प्रमुख तीर्थ आयोजन है, जो हर वर्ष लाखों हिंदुओं को आकर्षित करता है।

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