IMG 20260101 WA0010

इंदौर में ज़हर बना पानी: 10 की मौत, NDTV के सवाल पर मंत्री बोले– “तुम घंटा होकर आए हो!”

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी पीने से बड़ा हादसा सामने आया है। भागीरथपुरा इलाके में गंदा पानी सप्लाई होने से 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से ज्यादा लोग बीमार हैं। इस मामले ने प्रशासन की लापरवाही और पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है मामला?

पिछले कुछ दिनों से भागीरथपुरा, प्रेमनगर और आसपास के इलाकों में पानी से बदबू और गंदगी की शिकायतें आ रही थीं। लोगों ने बताया कि पानी का रंग बदला हुआ था और उसमें कीड़े दिखाई दे रहे थे। बावजूद इसके, पानी की आपूर्ति जारी रही। इसके सेवन से लोगों में उल्टी, दस्त और बुखार जैसी शिकायतें शुरू हुईं।

जब तक स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया, तब तक कई लोगों की हालत बिगड़ चुकी थी। 10 लोगों की मौत हो चुकी है और 60 से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती हैं।

NDTV पत्रकार ने पूछा सवाल, मंत्री भड़क गए

इस घटना पर NDTV के वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्वारी ने जब प्रदेश के शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल पूछा कि “इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद प्रशासनिक जवाबदेही कहां है?”, तो मंत्री का जवाब बेहद आपत्तिजनक रहा।

उन्होंने पत्रकार से कहा —

“तुम फोकट के सवाल मत पूछा करो, तुम घंटा होकर आए हो!”

मंत्री की यह टिप्पणी कैमरे में कैद हो गई और कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। वीडियो को लेकर लोगों ने मंत्री के व्यवहार की कड़ी आलोचना की।

विजयवर्गीय ने बाद में मांगी माफी

विवाद बढ़ने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने NDTV से बातचीत में कहा कि “घटना बहुत दुखद है, लोग परेशान हैं। उस समय माहौल भावनात्मक था, मुझसे शब्दों में गलती हो गई। मैं क्षमा चाहता हूं।”

उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित इलाके में लगातार राहत और मरम्मत कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिया बयान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार को इंदौर पहुंचे और अस्पताल में भर्ती मरीजों से मुलाकात की। उन्होंने मृतकों के परिजनों के लिए ₹5 लाख मुआवजा और बीमारों के मुफ्त इलाज की घोषणा की। सीएम ने कहा —

“यह घटना बेहद दुखद है, दोषियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।”

हाईकोर्ट की सख्ती, प्रशासन पर सवाल

इस बीच, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार से रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने कहा कि “पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा में लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है, जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।”

स्थानीय लोगों का आरोप

इलाके के लोगों का कहना है कि “नगर निगम के टैंक में नाले का पानी घुस गया था, लेकिन कई बार शिकायत के बावजूद किसी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया।”

सारांश

बिंदु

विवरण

घटना स्थल

भागीरथपुरा, इंदौर

मौतें

10

बीमार लोग

100+

मुख्य कारण

दूषित पेयजल

विवाद

NDTV पत्रकार से मंत्री की अभद्र टिप्पणी

सरकार की कार्रवाई

जांच समिति गठित, मुआवजा घोषित

न्यायिक हस्तक्षेप

हाईकोर्ट ने रिपोर्ट मांगी

निष्कर्ष:

इंदौर की यह त्रासदी न केवल प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बनी, बल्कि मंत्री के बयान ने संवेदनशील सवालों पर सत्ता के रवैये पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या जनता को सचमुच साफ पानी मिलेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *