बिहार विधानसभा चुनाव : दशहरा के बाद तय होंगी तारीख़ें
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। चुनाव आयोग ने संकेत दिया है कि मतदान तिथियों की घोषणा दशहरा (2 अक्टूबर) के बाद की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक छठ पूजा और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के बाद नवंबर के पहले-दूसरे पखवाड़े में चुनाव कराए जाने की संभावना है।
मतदाता सूची संशोधन बना बड़ा मुद्दा
इस बार चुनावों से पहले आयोग ने Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूची का विशेष संशोधन अभियान चलाया है। इसमें मृतक, डुप्लीकेट और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, वहीं नए नाम जोड़े जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार लाखों प्रविष्टियों की समीक्षा हो चुकी है और अंतिम सूची 30 सितंबर तक जारी हो सकती है।
हालाँकि, इस प्रक्रिया पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि आयोग बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम भी सूची से काट रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी निर्देश दिया है कि आयोग हटाए गए नामों की सूची और कारण सार्वजनिक करे ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
नए युवा मतदाताओं की एंट्री
चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार लगभग 10.7 लाख नए युवा मतदाता (18–19 आयु वर्ग) पहली बार वोट डालेंगे। यह वर्ग चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभा सकता है।
राजनीतिक हलचल और रणनीति
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार नई घोषणाएँ कर रहे हैं — हाल ही में उन्होंने छात्र क्रेडिट कार्ड योजना के तहत ब्याजमुक्त शिक्षा ऋण और निर्माण मजदूरों के लिए 802 करोड़ की नकद सहायता का ऐलान किया है।
दूसरी ओर, विपक्ष SIR को मुद्दा बनाकर सरकार और आयोग पर हमलावर है। उनका कहना है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी कर चुनावी समीकरण बदले जा रहे हैं।
छोटे दलों ने भी मोर्चा तेज़ किया है। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने सीट बंटवारे में “गुणवत्ता” को प्राथमिकता देने की बात कही है, जबकि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने 10 ठोस प्रस्ताव पारित कर दलित शिक्षा और रोज़गार जैसे मुद्दों को चुनावी एजेंडे में रखा है।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग की घोषणा पर टिकी हैं। अंतिम मतदाता सूची जारी होते ही तिथियाँ घोषित होने की संभावना है। माना जा रहा है कि मतदान नवंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में 2 से 3 चरणों में कराया जाएगा।
यह चुनाव बिहार की राजनीति में निर्णायक साबित हो सकता है क्योंकि एक ओर नीतीश कुमार अपनी उपलब्धियों और योजनाओं पर भरोसा जता रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष मतदाता सूची संशोधन और जनहित के मुद्दों को हथियार बना रहा है।

